ग्लोबल वॉर्मिंग के बढ़ते असर को लेकर वैज्ञानिकों की चिंता और गहरी हो गई है। जनवरी 2025 ने अब तक के सभी रिकॉर्ड तोड़ते हुए सबसे गर्म जनवरी का खिताब हासिल किया, भले ही अमेरिका में ठंड का कहर देखने को मिला हो। European Climate Service Copernicus की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल जनवरी का तापमान जनवरी 2024 से 0.09°C ज्यादा रहा।
ग्लोबल वॉर्मिंग में तेजी का दावा
इस रिकॉर्ड-ब्रेकिंग तापमान के साथ ही जलवायु वैज्ञानिकों के बीच एक नई बहस छिड़ गई है। NASA के पूर्व वैज्ञानिक James Hansen और अन्य विशेषज्ञों की एक नई स्टडी का दावा है कि ग्लोबल वॉर्मिंग की गति तेज हो रही है। हालांकि, इस दावे को लेकर वैज्ञानिक समुदाय में मतभेद बना हुआ है।
1.75°C ज्यादा गर्म हुई धरती
Copernicus के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2025 का वैश्विक तापमान औद्योगिक युग से पहले की तुलना में 1.75°C अधिक था। यह पिछले 19 महीनों में से 18वां महीना था जब धरती का तापमान 1.5°C के ग्लोबल वॉर्मिंग लिमिट को पार कर गया। हालांकि, वैज्ञानिक तब तक इस सीमा को “तोड़ना” नहीं मानेंगे जब तक कि लगातार 20 वर्षों तक तापमान इस स्तर से ऊपर ना रहे।
1.20 लाख साल में सबसे गर्म दौर
जलवायु परिवर्तन के ऐतिहासिक आंकड़ों को देखें तो यह युग पिछले 1,20,000 वर्षों में सबसे गर्म माना जा रहा है। Copernicus के रिकॉर्ड 1940 से उपलब्ध हैं, जबकि अन्य अमेरिकी और ब्रिटिश डेटा 1850 तक जाते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन इस तापमान वृद्धि का सबसे बड़ा कारण है।
El Nino-La Nina का असर भी बदला
आमतौर पर, El Nino के दौरान धरती ज्यादा गर्म होती है, जबकि La Nina इस प्रभाव को कुछ हद तक कम कर देता है। 2024 में El Nino के बावजूद धरती उम्मीद से अधिक गर्म रही। अब जनवरी 2025 में La Nina शुरू हो चुका है, जिससे वैज्ञानिकों को उम्मीद थी कि तापमान में गिरावट आएगी, लेकिन रिकॉर्ड गर्मी जारी है।
European Climate Expert Samantha Burgess का कहना है कि El Nino के बाद तापमान गिरने की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह है कि समुद्रों का तापमान लगातार रिकॉर्ड स्तर पर बना हुआ है।
अमेरिका में सर्दी, लेकिन दुनिया भर में रिकॉर्ड गर्मी
अमेरिका में भले ही जनवरी के दौरान भीषण ठंड देखने को मिली हो, लेकिन दुनिया के अन्य हिस्सों में तापमान औसत से कहीं ज्यादा दर्ज किया गया। कनाडा के आर्कटिक इलाकों में तापमान 30°C तक ज्यादा था, जिससे समुद्री बर्फ तक पिघलने लगी।
Copernicus की रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी में आर्कटिक में समुद्री बर्फ का स्तर सबसे कम था, जबकि अमेरिका स्थित National Snow and Ice Data Center ने इसे 2018 के बाद दूसरा सबसे कम स्तर बताया।
2025 भी बना सकता है नया रिकॉर्ड
हालांकि, फरवरी 2025 की शुरुआत पिछले साल के मुकाबले ठंडी रही है, लेकिन वैज्ञानिक अभी भी इस साल को रिकॉर्ड-ब्रेकिंग मानने से पीछे नहीं हट रहे। NASA के पूर्व वैज्ञानिक James Hansen का कहना है कि पिछले 15 वर्षों में धरती पहले के 40 वर्षों की तुलना में दोगुनी तेजी से गर्म हुई है।
University of Michigan के डीन Jonathan Overpeck का मानना है कि 2023, 2024 और अब 2025 की शुरुआत में लगातार रिकॉर्ड गर्मी ग्लोबल वॉर्मिंग के बढ़ते प्रभाव का संकेत है। हालांकि, Princeton के Gabe Vecchi और University of Pennsylvania के Michael Mann इस बात से सहमत नहीं हैं कि जलवायु परिवर्तन की गति तेज हो रही है।
निष्कर्ष
जनवरी 2025 का तापमान रिकॉर्ड पर पहुंचना ग्लोबल वॉर्मिंग की बढ़ती रफ्तार को दर्शाता है। वैज्ञानिकों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि La Nina के बावजूद तापमान में कोई खास गिरावट नहीं आई। अगर यही ट्रेंड जारी रहा, तो 2025 भी अब तक के सबसे गर्म वर्षों में शामिल हो सकता है।