आज शिवरात्रि के मौके पर हर शहर में शिवालयों में भक्तों का तांता लगा हुआ है. देश में हर जगह भोले के भक्त उन्हें खुश करने के लिए पूजा अर्चना में जुटे हैं. कहा जाता है कि अगर इस दिन बाबा भोले को खुश कर दिया तो सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं. इसीलिए शिवरात्रि को सभी प्रमुख त्योहारों की तरह काफी उत्साह के साथ मनाया जाता है. इस बार शिवरात्रि की तिथि को लेकर भक्तों में असमंजस की स्थिति बनी हुई थी, क्योंकि इस बार 13 फरवरी और 14 फरवरी दोनों ही तिथियों में शिवरात्रि का संयोग बन रहा है. हालांकि हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को महाशिवरात्रि मनाई जाती है. शास्त्रों के मुताबिक त्रयोदशी युक्त चतुर्थी के दिन ही इस पर्व को मनाया जाता है. इसीलिए आज यानी 13 फरवरी को ही सभी जगह शिवरात्रि धूमधाम से मनाई जा रही है. हम शिवरात्रि को लेकर आपके कुछ ऐसे ही सवालों के यहां जवाब दे रहे हैं, जिन्हें लोग अक्सर जानना चाहते हैं. 
प्रश्‍न: महाशिवरात्रि कब मनाई जाती है?
उत्तर:
हिंदू कैलेंडर के अनुसार, यह पर्व फाल्गुन महीने की कृष्णपक्ष की चतुर्थदशी तिथि को मनाया जाता है.  
प्रश्‍न: महाशिवरात्रि क्‍यों मनाई जाती है?उत्तर:
ऐसा माना जाता है कि इस दिन भगवान शिव और पार्वती का विवाह हुआ था.
  प्रश्‍न: श्रद्धालु महाशिवरात्रि पर क्या करते हैं?उत्तर:
इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं और भगवान शिव के मंत्र ‘ओम नम: शिवाय’ का जाप करते हैं. इस दिन शिवलिंग पर दूध, पानी, शहद, दही, घी, बेल पत्र आदि चढ़ाया जाता है.  
प्रश्‍न: क्‍या महाशिवरात्री केवल भारत में ही मनाई जाती है?उत्तर:
महाशिवरात्रि भारतभर में और पड़ोसी देश नेपाल में भी मनाई जाती है. भारत के मध्‍यप्रदेश में जिले उज्‍जैन में यह पर्व काफी धूमधाम से मनाया जाता है, कहते हैं यहां भगवान शिव रहते है. यहां, भक्त भगवान शिव की मूर्ति के साथ जुलूस निकालते हैं.   महाशिवरात्रि को लेकर कई तरह की पौराणिक कथाएं जुड़ी हुई हैं. एक लोकप्रिय पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार एक शिकारी को जंगल में अपने भोजन के लिए कुछ भी नहीं मिल रहा था. वह अपने शिकार के लिए ईधर-उधर भटक रहा था. वह शिकार करने के लिए पास के पेड़ पर चढ़कर बैठा, यह जाने बिना की साथ वाले पेड़ पर शिवलिंग रखा हुआ है. भगवान शिव शिकारी के सामने प्रकट हुए और उसे आशीर्वाद दिया. कहते हैं इसके बाद उस शिकारी ने मांस खाना बंद कर दिया.  
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