आदिसंन्यासी शंकर की गृहस्थ लीला के अंश, शिव-पार्वती विवाह की प्रक्रिया तो महानिशा में आरंभ हुई लेकिन दयानिधि से उन्हीं के जैसे दाम्पत्य की कामना करने का क्रम मंगलवार को मंगला आरती के साथ ही बाबा विश्वनाथ के दरबार में शुरू हो गया। देश-दुनिया से जुटे श्रद्धालुओं ने महाशिवरात्रि के दिन बाबा विश्वनाथ से जीवन में विपरीत परिस्थितियों और बुराइयों पर विजय की कामना भी की। 

सजग हो गए सभी नर-नारी
मंगला आरती के अंतिम चरण में जैसे ही बाबा के मंदिर में घंटा घड़ियाल की ध्वनि अपने चरम पर पहुंची उसकी आवाज ज्ञानवापी  क्रासिंग पर कतार में खड़ भक्तों तक पहुंचने लगी। सभी को आभास हो गया कि घंटों की प्रतीक्षा अब पूर्ण होने वाली है। कतार में लगने वाले सभी नर-नारी सजग हो गए। बाबा दर्शन हेतु दो करातें लगी थीं। एक ज्ञानवापी से चौक के तरफ से दूसरी ज्ञानवापी से गोदौलिया की ओर। भक्तों के बीच हरहर महादेव के जयघोष का क्रम शुरू हो गया। रात्रि ढ़ाई से साढ़े तीन बजे तक मंगला आरती के बाद आघे घंटे में गर्भगृह की सफाई की गई और चार बजे सामान्य भक्तों के लिए मंदिर के पट खोल दिए गए। दर्शनार्थियों की कतार रात्रि दस बजे से ही लग गई थी। 
दूर तक लग चुकी थी कतार
भोर में चार बजे जिस वक्त जनसामान्य के लिए मंदिर के पट खोले गए उस समय दर्शनार्थियों की कतार दक्षिण में गोदौलिया से आगे और उत्तर में बुलानाला तक पहुंच चुकी थी। सुबह 8 बजे तक 50 हजार से अधिक भक्तों को दर्शन कराया गया। दोपहर दो बजे तक यह संख्या एक लाख के पार पहुंच गई। इस बार सभी को शृगार गौरी की ओर से विश्वनाथ मंदिर में प्रवेश दिया गया। बाबा के दर्शन के लिए हर बार भक्तों को छत्ताद्वार से प्रवेश देकर कंट्रोल रूम की ओर से रानी भवनी मंदिर के रास्ते प्रवेश दिया जाता था।
एसपी सुरक्षा करते रहे दौरा
दर्शनार्थियों की सुविधा की दृष्टि से किए गए प्रबंधों को लगातार निगरानी के लिए एसपी सुरक्षा ज्ञानवापी शैलेंद्र सिंह लगातार विभिन्न सुरक्षा प्वाइंटों का निरीक्षण करते दिख। वह सुरक्षा कर्मियों को इस बात की दाकीद करते भी सुने गए कि किसी भी भक्त के साथ दुर्व्यवहार न किया जाए। मंदिर में आने वाले भक्तों के लिए चिकित्सकों की एक टीम विशेष रूप से विश्वनाथ मंदिर में लगाई गई थी। 
नहीं सजाया जा सका प्रवेश द्वार
काशी विश्वनाथ मंदिर के अंदर तो फूल मलाओं से सजावट की गई थी लेकिन मंदिर के बाहर माला की एक लड़ी तक नहीं दिखी। यही नहीं डेढ़सीपुल स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर का प्रवेश द्वार भी एक अदद फूल की सजावट के लिए तरस गया। छत्ता द्वार पर भी यही हाल रहा। करीब एक दशक पहले तक विश्वनाथ गली के दुकानदार सरस्वतीफाटक से नीलकंठ,कोतवालपुरा, बांसफाटक, ढुंढिराज विश्वनाथ गली, साक्षीविनायक विश्वनाथ गली और डेढ़सीपुल तक मालाफूल और बिजली के झालरों से सजावट कराते थे लेकिन मंदिर प्रबंधन की लगातार आपत्तियों के कारण दुकानदारों ने हाथ पीछे खींच लिए।  
ढूंढिराज से मिला दिव्यांगों को प्रवेश
विश्वनाथ मंदिर में दर्शन करने पहुंचे बुजुर्ग और दिव्यांग नागरिकों को ढुंढिराज गणेश (गेट नंबर एक) से प्रवेश दिया गया। बाहर से आई फोर्स ने अधिकारियों की ओर से सूचना के अभाव में पहले कुछ दिव्यांगों को इधर से जाने से रोक दिया था। कुछ बुजुर्गों को भी कतार में खड़े होना  पड़ा था। सुबह आठ बजे एसपी ज्ञानवापी ने निरीक्षण के दौरान जब स्पष्ट किया तो रोकटोक बंद हो गई।
पंचक्रोशी यात्रियों की उमड़ी भीड़
दोपहर भोग आरती के बाद भले ही कुछ देर के लिए विश्वनाथ मंदिर में भीड़ की स्थिति सामान्य हो गई हो लेकिन दोपहर दो बजे के बाद पंचक्रोशी यात्रियों की वापसी के साथ ही एक बाद फिर मंदिर में भीड़ का दबाव बढ़ गया। हजारों की संख्या में पंचक्रोशी यात्रियों को गेट नंबर चार से विश्वनाथ मंदिर की ओर भेजा गया।